Ek Buddha Story

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Rohan ki kahani



किसी नगर में रोहन नाम का एक लड़का रहता था उसकी उम्र करीब 22 वर्ष थी और वह पढ़ाई खत्म करने के बाद किसी उद्देश्य के बिना दिन भर इधर-उधर घूमता रहता था उसे ना किसी काम में रुचि थी ना ही कोई ऐसा सपना था जिसे पाने के लिए वह मेहनत करता रोहन के माता-पिता उसकी इस स्थिति को देखकर चिंतित रहते थे उन्होंने कई बार उसे समझाने की कोशिश की लेकिन हर बार वह उनकी बात अनसुनी कर देता दोस्तों आज की कहानी बहुत ही ज्ञानवर्धक है कहीं आप कहानी में खो ना जाएं इससे पहले वीडियो को लाइक और हम ज्ञानी बुद्धा चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए अगर आप भी गौतम बुद्ध को दिल से मानते हैं तो कमेंट में नमो बुद्धाय लिखना ना भूले तो चलो कहानी शुरू करते हैं रोहन का दिन व्यर्थ की गतिविधियों में निकलता था वह अक्सर अपने दोस्तों के साथ सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठा गपशप करता कभी वह मोबाइल पर गेम खेलता तो कभी बिना उद्देश्य के सोशल मीडिया स्क्रॉल करता धीरे-धीरे उसकी यह आदतें उसकी सेहत पर भी असर डालने लगी उसका शरीर कमजोर हो गया आंखें लाल रहने लगी और वह मानसिक तनाव महसूस करने लगा उसके मित्र भी उसकी हालत को लेकर मजाक उड़ाने लगे एक दिन उसके दोस्त ने हंसते हुए कहा अरे रोहन तुम तो बस इसी चाय की दुकान के स्थाई ग्राहक बनकर रह जाओगे तुम रे जीवन का क्या उद्देश्य है यह सुनकर रोहण को बुरा तो लगा लेकिन उसने अपने दोस्तों के तानों को भी गंभीरता से नहीं लिया एक सुबह जब सूरज धीरे-धीरे पूर्व दिशा से निकल रहा था और नगर के लोग अपने अपने कार्यों में व्यस्त हो रहे थे रोहन ने सोचा कि आज वह थोड़ा टहलने जाएगा वह यूं ही बिना किसी लक्ष्य के चलते चलते नगर के बाहर स्थित एक पुराने बौद्ध मठ तक पहुंच गया वहां का वातावरण बहुत शांत और दिव्य था पेड़ पौधे हरे भरे थे और हवा में एक अद्भुत ताजगी थी मठ के पास एक बड़ा सा बोधि वृक्ष था जिसके नीचे एक वृद्ध बौद्ध भिक्षु ध्यान में मग्न बैठे थे उनका चेहरा तेजस्वी था और उनके व्यक्तित्व में एक विशेष आभा थी रोहन ने उन्हें कुछ देर तक देखा और फिर धीरे-धीरे उनके पास जाकर बैठ गया भिक्षु ने आंखें खोली और रोहन को अपनी ओर देखते हुए मुस्कुराए उन्होंने बड़े प्यार से कहा वत्स क्या तुम किसी परेशानी में हो तुम मुझे बहुत विचलित लगते हो रोहन ने अपनी जीवन की दुविधा को भिक्षु के सामने रखते हुए कहा स्वामी जी मेरे जीवन में कोई उद्देश्य नहीं है मैं हमेशा खाली बैठा रहता हूं और मुझे समझ में नहीं आता कि मैं क्या करूं मेरे पास ना तो कोई सपना है और ना ही किसी चीज के लिए प्रेरणा भिक्षु ने कुछ देर तक रोहन को ध्यान से देखा और फिर गहरी आवाज में बोले पुत्र खाली बैठना सबसे बड़ा अभिशाप है तुम्हारा मन और शरीर दोनों ईश्वर की दी हुई अमूल्य देन है यदि तुम इन्हें व्यर्थ में बर्बाद करोगे तो यह जीवन भी बर्बाद हो जाएगा मैं तुम्हें सफलता के 10 नियम बताता हूं यदि तुम इन्हें अपनाओ ग तो तुम्हारा जीवन बदल सकता है रोहन ने श्रद्धा से सिर झुकाया और भिक्षु की बातों को ध्यान से सुनने के लिए तैयार हो गया नंबर पट एक सपनों को लक्ष्य में बदलो भिक्षु ने कहा हर व्यक्ति के मन में कोई सपना होता है परंतु केवल सपने देखना ही पर्याप्त नहीं है जो अपने सपनों को लक्ष्य में बदलते हैं वही सफलता प्राप्त करते हैं सबसे पहले यह तय करो कि तुम्हें अपने जीवन में क्या पाना है यदि तुम यह नहीं जानोगे तो तुम्हारा जीवन बिना दिशा के एक भटके हुए जहाज की तरह होगा यह सुनकर रोहन ने सोचा कि उसने अपने जीवन में कभी कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया था उसका मन पहली बार अपने जीवन की दिशा के बारे में सोचने पर मजबूर हुआ नंबर दो समय का सही उपयोग करो भिक्षु ने आगे कहा पुत्र संसार में समय सबसे मूल्यवान चीज है यदि तुम समय को बर्बाद करते हो तो यह कभी लौट कर नहीं आता जो व्यक्ति समय की कदर नहीं करता उसे जीवन में सफलता नहीं मिलती हर क्षण को एक अवसर की तरह देखो और उसका सदुपयोग करो एक थक दिन वही है जिसमें तुमने कुछ नया सीखा हो या कोई ऐसा कार्य किया हो जो तुम्हारे लक्ष्य के करीब ले जाए भिक्षु ने एक कथा सुनाई प्राचीन समय में एक राजा था जो बहुत आलसी था उसके राज्य का हाल बुरा था क्योंकि वह हमेशा सोचता रहता कि वह कल से काम करेगा एक दिन उसका राज्य शत्रुओं ने छीन लिया तब उसे एहसास हुआ कि उसका आलस्य और समय की बर्बादी ही उसकी हार का कारण बने नंबर तीन ध्यान और एकाग्रता को अपनाओ ध्यान वह साधन है जो तुम्हारे विचलित मन को एकाग्र करता है यदि तुम प्रतिदिन ध्यान करोगे तो तुम्हारा मन शांत होगा और तुम्हारी एकाग्रता बढ़ेगी भिक्षु ने कहा उन्होंने एक बोधक घटना सुनाई किसी समय एक युवा साधक अपने ध्यान में बहुत परेशानी महसूस करता था उसका मन भटकता था और उसे कभी शांति नहीं मिलती थी फिर उसके गुरु ने उसे पेड़ की जड़ों को देखने का निर्देश दिया साधक ने देखा कि जड़ें जमीन में गहराई तक फैली हैं और मजबूत हैं गुरु ने कहा जैसे जड़े पेड़ को स्थिर बनाती हैं वैसे ही ध्यान तुम्हारे मन को स्थिर करेगा तब से साधक का जीवन बदल गया नंबर चार छोटी-छोटी आदतें विकसित करो भिक्षु ने रोहण को बताया हर बड़ा परिवर्तन छोटी-छोटी आदतों से शुरू होता है तुम हर दिन एक नई सकारात्मक आदत अपनाने की कोशिश करो जैसे सुबह जल्दी उठना पढ़ाई करना या व्यायाम करना लगातार छोटे-छोटे सुधार तुम्हें महान उपलब्धियों तक ले जाएंगे रोहन को याद आया कि वह कभी अनुशासन में नहीं रहा था उसने सोचा कि अगर वह अपनी आदतें सुधारना शुरू कर दे तो शायद उसका जीवन भी बेहतर हो सकता है नंबर पांच स्वास्थ्य का ध्यान रखो भिक्षु ने गंभीरता से कहा एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है यदि तुम अपने शरीर का ध्यान नहीं रखोगे तो तुम्हें सफलता प्राप्त करने में कठिनाई होगी तुम व्यायाम करो पौष्टिक आहार लो और अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाए रखो स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है रोहन ने यह सुनकर सोचा कि वह कितना कमजोर हो गया था उसने फैसला किया कि वह अपने शरीर को मजबूत बनाने के लिए हर दिन व्यायाम [संगीत] करेगा नंबर छ सकारात्मक सोच रखो भिक्षु ने कहा यदि तुम अपने जीवन में सकारात्मक सोच अपनाओ ग तो तुम्हें हर पर स्थिति में अच्छा देखने की आदत हो जाएगी तुम अपने विचारों को नियंत्रित करो क्योंकि वही तुम्हारे कार्यों को प्रभावित करते हैं नकारात्मक सोच सिर्फ बाधाएं खड़ी करती है भिक्षु ने एक प्रेरणादायक कथा सुनाई एक किसान था जिसके खेत में बाढ़ आ गई वह सोचता रहा कि अब उसका क्या होगा फिर उसने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया और नई फसल उगाने का प्रयास किया उसकी मेहनत रंग लाई और उसकी फसल पहले से बेहतर हुई नंबर सा आत्म अनुशासन का पालन करो आत्म अनुशासन के बिना तुम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते भिक्षु ने कहा खुद को अनुशासित करना सीखो यह जानो कि कब क्या करना है और कब क्या नहीं करना अपने समय और ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करो नंबर आठ विफलताओं से सीखो जीवन में असफलता ही तुम्हारा सबसे बड़ा शिक्षक है तुम असफलताओं को अपने अनुभव की तरह देखो और उनसे सीखो भिक्षु ने सलाह दी नंबर नौ हर दिन कुछ नया सीखो भिक्षु ने कहा ज्ञान अर्जित करने से तुम अपने जीवन में नई ऊंचाइयां पा सकते हो हर दिन कुछ नया सीखने की आदत डालो चाहे वह किताबें पढ़कर हो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर या अपने अनुभवों से सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती नंबर 10 कभी हार मत मानो एक बार एक मूर्तिकार ने एक सुंदर मूर्ति बनाने की कोशिश की पर बार-बार उसकी मूर्ति टूट जाती उसने हार नहीं मानी और हर बार अपनी गलती से सीखता रहा आखिरकार उसने एक उत्कृष्ट मूर्ति तैयार की जिसने उसे प्रसिद्ध बना दिया तो दोस्तों उम्मीद करता हूं आपको यह कहानी पसंद आई होगी ऐसी और कहानी वीडियो पाने के लिए हम ज्ञानी बुद्धा चैनल को सब्सक्राइब करें और वीडियो को लाइक करें मिलते हैं फिर किसी ऐसी और कहानी वीडियो के साथ अपना ख्याल रखें कमेंट में नमो बुद्धाय लिखना ना भूले 

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