कहानी: गुलाम का इंतजार
कहानी: गुलाम का इंतजार
गुलाम एक सीधा-सादा और मेहनती लड़का था। उसकी जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था। उसके पास पैसा, इज्जत, और सबसे खास, ईशा का प्यार था। ईशा उसकी दुनिया थी। जब भी गुलाम उसे देखता, उसकी आंखों में बस वही होती। दोनों एक-दूसरे के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे।
गुलाम ने ईशा को हमेशा दिल से चाहा और हर सुख-दुख में उसके साथ खड़ा रहा। ईशा भी उसके प्यार का जवाब प्यार से देती थी। वे दोनों साथ घूमते, सपने बुनते, और आने वाले कल की बातें करते। गुलाम ने कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा होगा, जो सब कुछ बदल कर रख देगा।
एक दिन, गुलाम के बिजनेस में बड़ा नुकसान हो गया। जो पैसा, इज्जत, और शानो-शौकत थी, वह सब एक झटके में खत्म हो गई। गुलाम कर्ज़ में डूब गया। जब तक वह अपने पैरों पर वापस खड़ा होने की कोशिश करता, ईशा धीरे-धीरे बदलने लगी। उसका गुलाम के प्रति प्यार ठंडा पड़ने लगा। गुलाम यह महसूस कर रहा था, पर उसने सोचा कि शायद वक्त का असर है, और ईशा उसे समझेगी।
लेकिन जब हालत और बिगड़ गए, तब ईशा ने उसे छोड़ने का फैसला कर लिया। उसने गुलाम से कहा, "मैं अब तुम्हारे साथ नहीं रह सकती। मुझे आगे बढ़ना है, और तुम्हारे पास अब कुछ नहीं बचा है।" यह सुनकर गुलाम का दिल टूट गया। उसने ईशा से बहुत मिन्नतें कीं, उसे समझाने की कोशिश की, पर ईशा ने उसकी एक न सुनी और चली गई।
गुलाम अकेला रह गया, बिखरा हुआ, लेकिन उसके दिल में अब भी ईशा के लौटने की उम्मीद थी। उसने अपने जीवन को फिर से बनाने की कोशिश की, लेकिन ईशा का खयाल हर पल उसके साथ था। वह रोज उसी जगह पर बैठता, जहाँ कभी वह और ईशा घंटों बैठा करते थे। उसकी आंखें हमेशा दरवाजे पर होतीं, जैसे वह ईशा के लौटने का इंतजार कर रहा हो।
वक्त बीतता गया, लेकिन गुलाम का इंतजार खत्म नहीं हुआ। वह जानता था कि ईशा वापस नहीं आएगी, फिर भी उसका दिल उसे रोक नहीं पाया। वह आज भी उसी प्यार के साथ जी रहा था, उसी इंतजार में कि शायद एक दिन ईशा उसे फिर से मिलने आएगी।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें